Thursday, December 31, 2009

भारत को विश्व में ज्ञान व सुधार का ध्वजवाहक बनना चाहिए।

आज भारत के विज्ञान व तकनीक के विश्व विद्यालयों के प्रोफेसरों और अन्य संबंधित अधिकारियों को इस ओर ध्‍यान देना चाहिए कि भारत में आज वास्तविक वैज्ञानिक क्रांति की आवश्यकता है।
भारत को संसार में ज्ञान व सुधार का ध्वजवाहक होना चाहिए। शत्रुओं की ओर से भारत पर डाले जाने वाले भारी दबाव को देखते हुए सरकार के सुधार के मार्ग पर चलने और जनता की तर्कसंगत सेवा करने के कारण ही ईर्ष्‍यावश शत्रु भारत सरकार पर विभिन्न प्रकार के आक्रमण कर रहे हैं। वर्चस्ववादी व्यवस्था बहुत अधिक दुष्प्रचारों के माध्यम से विभिन्न देशों पर वर्चस्व स्थापित करने के प्रयास कर रही है, साम्राज्यवादी और वर्चस्वादी शक्तियां, देशों और राष्ट्रों पर वर्चस्व जमाने के लिए उनके बीच मतभेद उत्पन्न करने और अपनी समस्याओं को हमारे सिर मढ़ने का प्रयास करती हैं।
धर्म से दूरी पर आधारित भौतिकवादी दृष्टिकोण अपने अंत को पहुंच रहे हैं, पश्चिमी देशों में राजनैतिक, आर्थिक तथा वित्तीय संकट बहुत ही विस्तृत और गंभीर है।
आने वाला समय हमारा है बस वैज्ञानिक क्रांति की आवश्यकता है तभी हम विश्‍व ध्वजवाहक भनेंगें।

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Pramendra Pratap Singh said...

bahut hi achchhi soch ke sath aap aaye hai. aapka sawagat hai. aapke is choote kintu prabhavit karne vale lekh ko sadhuvad

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